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1 अप्रैल से बदल रहा है इनकम टैक्स का गणित, आपका सैलरी स्ट्रक्चर पर पड़ सकता है असर; जानें पूरी डिटेल्स

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Mar 28, 2026 05:56 pm IST,  Updated : Mar 28, 2026 05:56 pm IST

अप्रैल का महीना शुरू होने वाला है और इसके साथ ही नया वित्तीय वर्ष भी दस्तक देने जा रहा है। 1 अप्रैल से आयकर से जुड़े नए नियम लागू होंगे, जिनका सीधा असर आपकी सैलरी और टैक्स पर पड़ सकता है।

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1 अप्रैल से नए इनकम टैक्स रूल Image Source : CANVA

नया वित्त वर्ष (2026-27) शुरू होने में अब बस कुछ ही दिन बचे हैं। 1 अप्रैल 2026 से न केवल कैलेंडर बदलेगा, बल्कि आपकी सैलरी का गणित भी बदलने वाला है। आयकर अधिनियम, 2025 के नए प्रावधान प्रभावी होने जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर आपके सैलरी स्ट्रक्चर और टेक-होम सैलरी को प्रभावित कर सकते हैं।

इनकम टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि भले ही आपकी कंपनी आपका कुल पैकेज (CTC) न बढ़ाए, लेकिन 1 अप्रैल से आपकी पे-स्लिप में दिखने वाले भत्ते और कटौतियां बदल सकती हैं। आइए समझते हैं कि नए नियमों का आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा।

सैलरी स्ट्रक्चर में क्यों होगा बदलाव?

नए नियमों के तहत सरकार ने भत्तों, रिइम्बर्समेंट और कंपनी से मिलने वाली सुविधाओं के मूल्यांकन के नियम कड़े कर दिए हैं। पहले कंपनियां टैक्स बचाने के लिए वेतन को कई अलग-अलग भत्तों में बांट देती थीं, लेकिन अब अधिकांश लाभों का एक निश्चित टैक्सेबल मूल्य परिभाषित कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब आपके वेतन का एक बड़ा हिस्सा टैक्सेबल इनकम माना जा सकता है।

कम हो सकती है इन-हैंड सैलरी

देश में लागू हो चुके नए लेबर कोड के अनुसार, अब किसी भी कर्मचारी की बेसिक सैलरी उसके कुल सीटीसी (CTC) का कम से कम 50% होना अनिवार्य है।बेसिक सैलरी बढ़ने से आपका पीएफ (PF) और ग्रेच्युटी में योगदान बढ़ जाएगा। वहीं, भविष्य के लिए आपकी बचत तो बढ़ेगी, लेकिन हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी कम हो सकती है।

कंपनी की सुविधाएं अब होंगी टैक्सेबल

अगर आपकी कंपनी आपको कुछ खास सुविधाएं देती है, तो अब उन पर टैक्स देना होगा। ऑफिस की कार का निजी इस्तेमाल और ड्राइवर का वेतन अब आपकी टैक्सेबल इनकम में जोड़ा जाएगा। वहीं, कंपनी की ओर से मिला घर, नौकर, या बिजली-पानी के बिल का भुगतान भी अब टैक्स के दायरे में आएगा। बच्चों की स्कूल फीस (तय सीमा से अधिक), कंपनी का क्रेडिट कार्ड, क्लब सदस्यता और पेड हॉलिडे जैसी सुविधाओं पर अब स्पष्ट रूप से टैक्स लगेगा।

ओल्ड बनाम न्यू टैक्स सिस्टम

1 अप्रैल से यह तय करना और भी जरूरी हो जाएगा कि आपके लिए कौन सी टैक्स व्यवस्था बेहतर है। न्यू टैक्स रिजीम में टैक्स की दरें कम हैं, लेकिन एचआरए (HRA) और 80C जैसी छूटें नहीं मिलतीं। अगर आपकी सैलरी का स्ट्रक्चर सरल है, तो यह बेहतर है।वहीं, ओल्ड टैक्स रिजीम में आपकी सैलरी में कई भत्ते शामिल हैं और आप निवेश (LIC, PPF आदि) करते हैं, तो पुरानी व्यवस्था अभी भी टैक्स बचाने में मददगार हो सकती है।

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